बहरागोड़ा : आधुनिकता और डिजिटल मनोरंजन के इस दौर में भी झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र बहरागोड़ा में पारंपरिक लोककला का जादू आज भी बरकरार है। पिछले वर्ष की तर्ज पर इस वर्ष भी 5 नवंबर की रात कला, संस्कृति और रंगमंच का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
बंग संस्कृति के प्रचार-प्रसार और नेताजी पार्क के उन्नयन के उद्देश्य से नेताजी सुभाष शिशु उद्यान से सटे सैरात मैदान में इस सांस्कृतिक महासंग्राम का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान बहरागोड़ा के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक बांग्ला जात्रा 'प्रभास ओपेरा' की धूम रहने वाली है। इस आयोजन को भव्य और सफल बनाने के लिए स्थानीय कमेटियों ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
पश्चिम बंगाल की नामी नाटक मंडलियां बिखेरेंगी जलवा
आयोजन कमेटी से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष दर्शकों के मनोरंजन के लिए पश्चिम बंगाल की विख्यात जात्रा नाटक मंडलियों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें ''एक अभिमन्यु चक्रव्यूह' जैसे नाटक प्रमुख हैं। इन जात्राओं के माध्यम से पश्चिम बंगाल के नामी-गिरामी कलाकारों द्वारा पौराणिक, ऐतिहासिक और समसामयिक सामाजिक विषयों पर आधारित नाटकों का जीवंत मंचन किया जाएगा।
आज भी जीवंत है जात्रा का क्रेज
बहरागोड़ा पश्चिम बंगाल की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है, जिसके कारण यहाँ की एक अनूठी सांस्कृतिक पहचान है। यहाँ दुर्गा पूजा के उत्सव संपन्न होते ही जात्रा नाटकों का दौर शुरू हो जाता है। स्थानीय बुजुर्गों और कला प्रेमियों का कहना है कि बहरागोड़ा की मिट्टी में जात्रा संस्कृति रची-बसी है।
आज के दौर में जब सिनेमा और मोबाइल ने मनोरंजन के साधनों को सीमित कर दिया है, तब भी जात्रा के मंचन के दौरान पूरी-पूरी रात हजारों की संख्या में दर्शकों का जुटे रहना यह साबित करता है कि यह लोककला आज भी उतनी ही जीवित और प्रासंगिक है। नवंबर महीने में होने वाले इस सांस्कृतिक समागम को लेकर पूरे बहरागोड़ा क्षेत्र में अभी से उल्लास का माहौल है।

