सरायकेला : उत्तमडीह की जनसमस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय का किया घेराव, समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
सरायकेला/गम्हरिया: गम्हरिया प्रखंड के उत्तमडीह गांव की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर सोमवार को समाजसेवी अशीम महतो के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गांव की वर्षों से लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
हरिजन बस्ती आज भी सड़क सुविधा से वंचित
ग्रामीणों ने बताया कि उत्तमडीह की हरिजन बस्ती आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क नहीं होने के कारण लोगों को रोजमर्रा के आवागमन, बच्चों की पढ़ाई और बीमारों को अस्पताल पहुंचाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों से तालाब किनारे बने रास्ते का उपयोग किया जाता था, लेकिन हाल में रास्ता बाधित होने से लोगों को लंबा चक्कर लगाकर आना-जाना पड़ रहा है।
तालाब विवाद और जातीय भेदभाव की जांच की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने तालाब से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि तालाब के उपयोग के दौरान कुछ लोगों द्वारा जातीय भेदभाव किया जाता है। वहीं बिना किसी स्पष्ट कारण के तालाब का पानी निकाल दिए जाने से ग्रामीणों के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है।
वन भूमि और सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री की जांच की मांग
ग्रामीणों ने उत्तमडीह फुटबॉल मैदान के समीप स्थित वन भूमि एवं सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री की जांच कराने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या लेन-देन हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
विकास व्यवस्था पर उठाए सवाल
समाजसेवी अशीम महतो ने कहा कि आजादी के कई दशक बाद भी यदि किसी बस्ती तक सड़क नहीं पहुंची है, तो यह विकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से सड़क निर्माण, तालाब विवाद और सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
