झारखंड आंदोलनकारी और पूर्व कांग्रेसी नेता कालीपद सोरेन उर्फ केपी सोरेन सैकड़ों समर्थकों के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में शामिल हो गए। जिला मुख्यालय के टाउन हॉल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सिंहभूम सांसद जोबा माझी, मंत्री दीपक बिरुआ, खरसावां विधायक दशरथ गागराई, ईचागढ़ विधायक सविता महतो तथा जिलाध्यक्ष डॉ. शुभेन्दु महतो की मौजूदगी में झामुमो महासचिव विनोद पांडे ने उन्हें पार्टी का पट्टा पहनाकर स्वागत किया। राजनीतिक जानकार इसे केवल एक नेता का दल परिवर्तन नहीं, बल्कि कोल्हान की राजनीति में बदलते राजनीतिक और वैचारिक समीकरणों के रूप में देख रहे हैं।
शिक्षाविद् और झारखंड आंदोलन के बौद्धिक स्तंभ रहे हैं केपी सोरेन
केपी सोरेन की पहचान सिर्फ एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षाविद्, चिंतक और झारखंड आंदोलन के प्रमुख बौद्धिक चेहरों में रही है। उन्होंने भूगोल और संथाली विषय में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। वे राम मनोहर लोहिया कॉलेज में भूगोल के प्राध्यापक तथा बाद में रांची कॉलेज में संथाली भाषा के प्रोफेसर रहे। झारखंड आंदोलन के दौरान उनका जुड़ाव महान चिंतक डॉ राम दयाल मुंडा की टीम से रहा। इसके अलावा वे निर्मल मिंज और बीपी केशरी जैसे प्रमुख झारखंडी विचारकों के सहयोगी भी रहे हैं।
कांग्रेस पर उठाए सवाल, बदले मूल चरित्र की बात कही
झामुमो में शामिल होने के बाद केपी सोरेन ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा कालखंड कांग्रेस को दिया, लेकिन अब कांग्रेस पहले जैसी नहीं रही। उनके अनुसार कांग्रेस का जल, जंगल और जमीन से जुड़ा मूल चरित्र कमजोर हुआ है और पार्टी अपने सामाजिक सरोकारों से दूर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड आज एक नए दौर से गुजर रहा है और राज्य का युवा वर्ग नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे समय में युवाओं को सही दिशा और वैचारिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
हेमंत सोरेन के नेतृत्व पर जताया भरोसा
केपी सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनमें झारखंड को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन एक युवा, ऊर्जावान और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता हैं, जिनके नेतृत्व में झामुमो नई पहचान गढ़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में योग्य और अच्छे लोगों को स्थान मिलना उसकी दूरदर्शी सोच का प्रमाण है।
