जमशेदपुर : दिसंबर 2025 में हुई जीत महतो की मौत की निष्पक्ष पुनः जांच हो, नए एसएसपी से न्याय की उम्मीद – हरमोहन महतो
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2025 के अंत में मोबाइल चोरी के एक मामले में एमजीएम थाना पुलिस जीत महतो को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। बाद में गंभीर हालत में उन्हें एमजीएम अस्पताल लाया गया, जहां 31 दिसंबर 2025 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
हरमोहन महतो ने कहा कि DD बार कांड में पुलिस प्रशासन ने तत्काल बड़े स्तर पर कार्रवाई की। वरिष्ठ अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की गई, विशेष जांच दल (SIT) गठित हुआ और पूरे मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। वहीं दूसरी ओर, जीत महतो मामले में परिजनों द्वारा पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद उस स्तर की कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आम लोगों के मन में आज भी कई सवाल बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि उस समय की पुलिस कार्यप्रणाली, विशेषकर एमजीएम थाना की भूमिका और पूरे मामले की जांच प्रक्रिया पर लगातार प्रश्न उठते रहे। यदि किसी व्यक्ति की पुलिस हिरासत के बाद मौत होती है, तो ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। केवल विभागीय जांच से जनता का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं हो सकता।
हरमोहन महतो ने कहा कि नए एसएसपी के कार्यभार संभालने के बाद लोगों को निष्पक्ष और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था की उम्मीद जगी है। उन्होंने आग्रह किया कि जीत महतो मामले की सभी पहलुओं से पुनः समीक्षा कराई जाए तथा यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या दोष सामने आता है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति, अधिकारी या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि समान न्याय के पक्ष में है। कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है, इसलिए न्याय का पैमाना भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
"हम नए एसएसपी से अपेक्षा करते हैं कि वे दिसंबर 2025 में हुई जीत महतो की मौत के मामले की निष्पक्ष पुनः जांच कराकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस पहल करेंगे। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। यही कानून के शासन और लोकतंत्र की असली पहचान है।" — हरमोहन महतो ( कुड़मी समाज के वरिष्ठ नेता )
