जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान
हिमस्खलन के कारण आई बाढ़ से कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इस प्राकृतिक आपदा ने वर्ष 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई भीषण बाढ़ की याद ताजा कर दी है।
392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता
इस आपदा में अब तक चीन में तीन लोगों समेत करीब 392 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। वहीं 290 भारतीयों समेत 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता भारतीयों में बड़ी संख्या कैलास-मानसरोवर तीर्थयात्रियों की बताई जा रही है। अधिकारियों ने मृतकों की संख्या बढ़ने और बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका जताई है।
कई नेपाली जिलों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद तिमुरे में भोटेकोशी नदी के रास्ते बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक पहुंच गया। इसके बाद बाढ़ नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी समेत कई जिलों तक फैल गई। काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ गए।
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी अलर्ट
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। दोनों राज्यों को अलर्ट पर रखा गया है और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए NDRF की 20 टीमें तैनात की गई हैं।
हिमस्खलन से बाढ़ आने का शुरुआती आकलन
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, स्कॉटलैंड की डंडी यूनिवर्सिटी के ग्लेशियोलॉजिस्ट साइमन कुक ने बताया कि सैटेलाइट इमेजरी के शुरुआती विश्लेषण से संकेत मिलता है कि बाढ़ हिमस्खलन के कारण आई। शुरुआती आकलन के मुताबिक, ऊंचाई वाले ग्लेशियर से बर्फ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर हजारों फीट नीचे नेपाल की भोटेकोशी नदी की ओर गिरा, जिससे भारी ऊर्जा पैदा हुई और बर्फ पिघलकर बाढ़ के पानी में बदल गई।
भारत ने नेपाल को भेजी मानवीय सहायता
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि भारत ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) पहल के तहत नेपाल को 10 टन राहत सामग्री और आवश्यक दवाएं भेजी हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है।

