सरायकेला: आज दिनांक को सरायकेला-खरसावाँ जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत केंदमुंडी पंचायत के केंदमुंडी गाँव में बहुभाषी पत्रिका “प्रभाती” (प्रवेशांक) का भव्य एवं गरिमामय शुभ विमोचन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पंचायत के प्राक्तन मुखिया, समाजसेवी एवं शिक्षाविद सम्मानीय श्री महेन्द्रनाथ मुर्मू ने अपने करकमलों से पत्रिका का विमोचन किया।
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए श्री महेन्द्रनाथ मुर्मू ने पत्रिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा इस सार्थक साहित्यिक मुहिम से अधिकाधिक लोगों को जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल से निकलने वाली ऐसी बहुभाषी साहित्यिक पहल समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पत्रिका के संरक्षक-सह-प्रभारी संपादक श्री रबि कान्त भकत ने अपने वक्तव्य में कहा कि “प्रभाती” एक नई सुबह की पहली किरण की तरह है, जो आंचलिक लेखक-लेखिकाओं के विचारों, संवेदनाओं और स्थानीय सरोकारों का जीवंत दस्तावेज प्रस्तुत करती है। यह ग्रामीण क्षेत्र का एक सशक्त बहुभाषी प्रयास है, जहाँ हर भाषा अपनेपन के साथ खिलती है, हर लेखक अपनी मिट्टी की खुशबू लेकर आता है और हर पाठक को नई सोच, नई अनुभूति तथा नई प्रेरणा का उजास मिलता है। पत्रिका का मूल उद्देश्य शब्दों के माध्यम से समाज को जोड़ना और प्रत्येक हृदय में जागृति की प्रभात जगाना है।
“प्रभाती” के इस प्रवेशांक में झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा—तीन राज्यों के 62 सुमानधन्य आंचलिक लेखक-लेखिकाओं की रचनाएँ संकलित हैं। इसमें हिंदी, बांग्ला, ओड़िया, अंग्रेज़ी, संथाली, कुड़माली एवं संस्कृत भाषाओं में रचित 15 कहानियाँ, 47 कविताएँ, 7 लोक-संगीत रचनाएँ तथा 7 विचारात्मक एवं उपयोगी लेख सम्मिलित हैं। यह प्रकाशन पूर्णतः आंचलिक लेखक-लेखिकाओं के आपसी सहयोग से सम्पन्न हुआ है और भविष्य में भी इसी सहभागिता के साथ आगे बढ़ेगा।
पत्रिका के मुख्य संरक्षक डॉ. अरुपानन्द मंडल एवं श्री माणिक लाल महतो ने सभी शिक्षाविदों एवं साहित्यप्रेमियों से इस साहित्यिक प्रयास में सक्रिय सहभागिता की आकांक्षा व्यक्त की।
समारोह में सम्मानीय लेखक-लेखिकाओं में विकाश कुमार भकत, सुनील कुमार दे, मृणाल कांति पाल, अनिता महतो, डॉ. विकास चंद्र भकत, डॉ पूर्णचन्द्र बेरा सहित गाँव के गण्यमान्य नागरिक खिरोद भकत, बिरंचि भकत, मृत्युंजय भकत, राजीव भकत एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का समापन साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के प्रति समर्पण के संकल्प के साथ हुआ।


