झारखंड में लापता होने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीते एक साल में राज्य के विभिन्न जिलों से 849 से अधिक लोगों के गुम होने की शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें महिलाओं और किशोरियों की संख्या अधिक होना बेहद गंभीर माना जा रहा है। महीनेवार आंकड़ों में जनवरी में 87, फरवरी में 34, मार्च में 24, अप्रैल में 36, मई में 71, जून में 54, जुलाई में 67, अगस्त में 63, सितंबर में 108, अक्टूबर में 93 और नवंबर में 82 लोगों के लापता होने के मामले सामने आए, जबकि दिसंबर में सबसे अधिक 130 लोगों के गुम होने की शिकायत दर्ज की गई, जिससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुमशुदगी के पीछे पारिवारिक कलह, मानव तस्करी, रोजगार या बेहतर भविष्य की तलाश, प्रेम संबंधों के कारण घर छोड़ना और आपराधिक घटनाएं प्रमुख कारण हो सकते हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन की सतर्कता और समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई जा रही है, ताकि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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