राजनगर : भीमखंदा बूढ़ा बाबा मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़, महाभारत काल से जुड़ी हैं मान्यताएं
राजनगर: सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित भीमखंदा बूढ़ा बाबा मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। बोंगबोगा नदी तट पर स्थित इस मंदिर में प्रतिदिन झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार समेत आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
महाभारत काल से जुड़ी हैं स्थल की मान्यताएं
स्थानीय लोककथाओं और परंपराओं के अनुसार यह स्थल महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव माता कुंती के साथ इस क्षेत्र में आए थे।
नदी के बीच स्थित है प्राचीन शिवलिंग
बोंगबोगा नदी के बीचों-बीच स्थित शिवलिंग को श्री श्री पांडेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना पांडु पुत्र भीम ने की थी, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पांच पांडवों की एकता का प्रतीक है अर्जुन वृक्ष
मंदिर परिसर में स्थित एक विशेष वृक्ष को अर्जुन वृक्ष के नाम से जाना जाता है। इसकी शाखाओं की संरचना को पांच पांडवों और माता कुंती-माद्री का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह वृक्ष पांडवों की अटूट एकता और पारिवारिक समर्पण का संदेश देता है।
भीम का चूल्हा आज भी बना है आकर्षण का केंद्र
पर्यटक स्थल के उत्तर दिशा में चट्टानों पर बनी चूल्हानुमा आकृति को “भीमखंदा” कहा जाता है, जिसका अर्थ है “भीम का चूल्हा”। मान्यता है कि भीम ने हिडिंबा विवाह के अवसर पर आयोजित राजकीय भोज के लिए इसी चूल्हे पर भोजन तैयार किया था।
मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु इस चूल्हे के आर-पार होकर जीवन में सफलता और निष्पक्षता की कामना करते हैं।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है भीमखंदा
झारखंड सरकार द्वारा भीमखंदा को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए बैठने की व्यवस्था, चेयर, झूले और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और पौराणिक महत्व के कारण यह स्थल लगातार पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
शिवरात्रि पर होता है भव्य धार्मिक आयोजन
मंदिर के पुजारी विजय कुमार पति के अनुसार यह स्थल महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और यहां हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य हरि संकीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


