जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को अब पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जा रहा है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले हर मरीज के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर पर आधार कार्ड और मोबाइल नंबर देना अनिवार्य कर दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभागों के कर्मियों को इसका प्रशिक्षण भी दे दिया है, ताकि जल्द ही पूरी उपचार प्रक्रिया को पेपरलेस बनाया जा सके।
बीमारियों का लाइव ग्राफ, स्वास्थ्य विभाग रहेगा सतर्क
नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए शहर में फैलने वाली बीमारियों के पैटर्न को समझना
आसान हो जाएगा। पहले मरीजों का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज होने के कारण किसी
इलाके में संक्रमण का तुरंत पता नहीं चल पाता था। अब डिजिटल डेटा से यदि किसी
क्षेत्र में डेंगू, वायरल फीवर या हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ते हैं, तो उसका
ग्राफ सिस्टम पर तुरंत दिखाई देगा, जिससे स्वास्थ्य विभाग समय रहते जरूरी कदम
उठा सकेगा।
मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत, फाइलों से छुटकारा
डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से मरीजों को अब अपनी पुरानी पर्चियां, फाइलें या
जांच रिपोर्ट साथ लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर
कंप्यूटर के जरिए एक क्लिक में मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री देख सकेंगे। इससे
इलाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को लंबी कतारों व दस्तावेज खोने की चिंता
से राहत मिलेगी।
महामारी नियंत्रण और स्वास्थ्य नीति में होगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल का यह डिजिटल बदलाव भविष्य में महामारी
नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रियल टाइम डेटा उपलब्ध होने से जिला
प्रशासन को स्वास्थ्य बजट तय करने और डॉक्टरों की तैनाती में भी आसानी होगी। यह
पहल जमशेदपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए इलाज को अधिक
आसान, तेज और सुरक्षित बनाएगी।
